लेखनी कहानी -16-Oct-2023
# प्रतियोगिता
16/10/23
विषय:- मौन।
शीर्षक:- सबकी झोली भर दो मॉ।
मैं तो तेरा बालक माते,
नजर तनिक अब कर दो मॉ।
द्वार खड़े जो भक्त तुम्हारे,
सबकी झोली भर दो मॉ।टेक।
मौन पुकार सुनो मॉ सबकी,
व्यथित वेदना जन-जन मन की।
अन्तर्मन की रीती गागर-,
चाह लिए मधुरिम सावन की।
सबकी पीर मिटा दो अम्बे,
जग को सुखमय कर दो मॉ।
द्वार खड़े जो भक्त तुम्हारे,
सबकी झोली भर दो मॉ।1।
फैल रहा जग में अंधियारा,
कॉप रहा अब भाई-चारा,
रौंद रहे कुछ आज संस्कृति-,
लगे विधर्मी कुछ को प्यारा।
सत्य-न्याय पर प्रश्न चिन्ह जो,
उनको भी हल कर दो मॉ।
द्वार खड़े जो भक्त तुम्हारे,
सबकी झोली भर दो मॉ।2।
प्रसरित है विष भरी विषमता,
ढूँढ रहा मानव मानवता ,
कथा-व्यास-पण्डाल बहुत हैं-,
अट्टहास करती दानवता।
नाना वाद कुलॉचे मारे,
देश सुरक्षित कर दो मॉ।
द्वार खड़े जो भक्त तुम्हारे,
सबकी झोली भर दो मॉ।3।
आज देश में पवन पश्चिमी,
नूतन तूफान मचाता है,
संस्कार हो रहा प्रदूषित,
शुचि अमृत विष बन जाता है।
धर्म-ध्वजा नीलाम्बर छाये-
ऐसा ही कुछ कर दो मॉ।
द्वार खड़े जो भक्त तुम्हारे,
सबकी झोली भर दो मॉ।4।
रचना मौलिक,अप्रकाशित,स्वरचित,सर्वाधिकार सुरक्षित है।
हरिश्चन्द्र त्रिपाठी 'हरीश;
रायबरेली (उप्र) 229010
Mohammed urooj khan
18-Oct-2023 05:26 PM
👌👌👌👌
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Punam verma
17-Oct-2023 07:53 AM
Nice👍
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Gunjan Kamal
17-Oct-2023 07:27 AM
👏👌
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